Wednesday, July 30, 2008

जीवन की सफलता

जीवन ऊर्जा का महासागर हैकाल के किनारे पर अगणित अंतहीन ऊर्जा की लहरे टकराती रहती हैइनकी कोई शुरुआत है, और कोई अंत; बस मध्य हैमनुष्य भी इन अनगिनत तरंगो मे एक छोटी-सी तरंग हैएक लघु बीज है-असीम संभावनाओ का

तरंग की स्वाभाविक आकांक्षा है, सागर होने की, और बीज की स्वाभाविक चाहत है कि वृक्ष हो जाएतरंग जब तक महासागर की व्यापकता मे फैले नही, बीज जब तक फूलों से खिले नही, फलों से लदे नही, तब तक तृप्ति असंभव हैइनके अस्तित्व की, इनके जीवन की सफलता भी इसी मे है

मनुष्य की स्वाभाविक आकांक्षा है परमात्मा होने कीपरमात्मा का अर्थ है-जीवन की सफलता और पूर्णतापरमात्मा स्वर्ग या आसमान मे बैठा हुआ कोई व्यक्ति नही हैयह तो जीवन की अन्तिम सफलता है, परम पूर्णता हैजीवन की तृप्ति एवम परितोष यही हैइसके पहले पड़ाव तो बहुत है, पर मंजिल नही है

इस मंजिल तक पहुंचे बिना, प्रत्येक मनुष्य पीड़ित रहता हैअसफलता का दंश उसे सालता रहा हैवह चाहे जितना धन कमा ले, कितना ही वैभव जुटा ले, किंतु उसे अपने जीवन की सफलता एवम सार्थकता की अनुभूति नही हो पातीएक कंटीली चुभन, बैचेनी भरा दरद हमेशा बना रहता हैइसे भुलाने की कितनी ही कोशिश की जाती है, लेकिन हर कुंठा मे ही तब्दील होती रहती है

और यह ठीक भी है, क्योंकि यदि कहीं ऐसा हो जाए तो बीज कभी भी वृक्षबनेगातरंग को कभी सागर की व्यापकता मिलेगीबीज जब तक वृक्ष बन कर फूलों से खिले, उसकी सुगंध मुक्त आकाश में बिखरे, तब तक परित्रप्ति कैसी ? तरंग जब तक महासागर की व्यापकता पाए तब तक सफलता कैसी ? मनुष्य भी जब तक जीवन के परम शिखर परमात्मा को छूकर उससे एकाकार हो, तब तक उसकी सार्थकता कैसी ?

जीवन की सफलता तो परमात्मा की अनंतता को पाने में हैंइसे बिना पाए जिन्होंने समझ लिया कि वे सफल हो गए, बड़े अभागे हैंबडभागी तो वे हैं, जो अनुभव करते है कि जीवन मे कुछ भी करो, असफलता हाथ लग सकती हैंअतः प्रयास करते रहना चाहिएऐसे व्यक्ति एक--एक दिन परमात्मा को पा लेंगे, स्वयं परमात्मा हो जायेँगे

2 comments:

Dr. Anil Kumar Tyagi said...

प्रत्येक जीव ईश्वर का एक अंश, ईश्वर ही उसका मूल है। इसीलिऎ प्रत्येक अंश का अपने मूल में पहुंचना एक स्वाभाविक प्रक्रिया है। अपने मूल स्वरूप में पहुंचने के लिए अवश्यकता है सही राह की, और यह राह सदगुरू ही दिखा सकता है।

राजेंद्र माहेश्वरी said...

Dr. Anil Kumar Tyagi

yahi satay hai.

Thanks.